" ज्योतिष एवं वास्तु से सम्बंधित इस ब्लॉग पर आपको ' आचार्य रंजन ' का नमस्कार !! "

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Wednesday, May 6, 2009

* सोमवती अमावश्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने की विधि एवं महात्म्य *


जातक (कर्ता) सबसे पहले पीपल पर दुग्ध-मिश्रित जल अर्पण करे और ह्रदय से भगवान् विष्णु को नमस्कार करें , इसके बाद दायें तरफ घी का एवं बांयें तरफ तेल का दीपक तथा धूप जलाएं । तेल के दीपक के निचे उड़द और काले तिल रखें , घी के दीपक के नीचे चने की दाल और गुड रखें । इसके बाद पीपल की जड़ में ही गणपति का ध्यान करें और सम्पूर्ण पाप-निवृति हेतु संकल्प करें । तदोपरांत जड़ में ही सूक्ष्म गणपति पूजन करें और पीपल को विष्णुमय समझते हुए षोडशोपचार से पूजन - प्रार्थना करें । इसके बाद परिक्रमा प्रारंभ करें । प्रत्येक परिक्रमा में एक घी की बत्ती जलते हुए घी के दीपक में जलाएं । एक मिठाई व एक फल पीपल को स्पर्श कर पात्र में रखें इसके साथ-साथ दुग्ध-मिश्रित जल व फूल भी पीपल की जड़ में चढाते रहें और सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें । परिक्रमा के दौरान अनवरत रूप से "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय " , इस द्वादश अक्षर मंत्र का जाप अवश्य करते रहना चाहिए । इसी प्रकार १०८ परिक्रमा सम्पूर्ण करें । तदोपरांत पीपल को पकड़कर प्रार्थना करें । परिक्रमा उपरांत पात्र के प्रसाद को वितरित करें स्वयं भी ग्रहण करें कारण की यह भगवान् विष्णु का प्रसाद है ।

सोमवती अमावश्या को किया गया यह प्रयोग तुंरत फलदायी होता है , कारण पीपल-वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है। और हमारे शास्त्रों में साक्षात् 'विष्णु-रूप ' की संज्ञा दी गयी है । अतः यह प्रयोग मानव को रोगों से मुक्ति दिलाता है , विद्यार्थी को पूर्ण विद्या की प्राप्ति होती है ,विवाह की सभी रुकावटें दूर होती है, कारोबार में वृद्धि होती है ,उजडा हुआ घर पुनः वस् जाता है एवं मानव जघन्य पापों से मुक्त हो जाता है , उसकी सारी मुसीबतें समाप्त हो जाती है और उस व्यक्ति के मस्तिष्क में अखंड शांति की अनुभूति होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यदि देखा जाये तो पीपल एक ऐसा वृक्ष है जो चौबीस घंटे ऑक्सीजन देता है। ऑक्सीजन यानि प्राण-वायु । इस रहस्य को जानकर हमारे ऋषियों ने पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने और पीपल के वृक्ष के निचे बैठकर तप करने का मार्ग खोजा । इसका दूसरा वैज्ञानिक कारण यह भी था की पीपल के पत्तों में जो तरल पदार्थ होता है और मनुष्य में जो तरल पदार्थ होता है वह एक समान है । अतः दोनों के बीच तारतम्य स्थापित हो जाता है और ज्ञान की धारा प्रवाहित हो उठती है । इसलिए हमारे ज्ञानियों ने कहा की मनुष्य को संकल्प लेकर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए । इस परिक्रमा के दौरान आप ऑक्सीजन के प्रभाव क्षेत्र में रहते हैं । एक तरह से पत्तों से ऑक्सीजन झरनों की तरह झरता है और आप उसमें सराबोर हो जाते हैं। आपके मन में शांति आ जाती है, संकल्प के प्रति आस्था जाग जाती है और तनाव स्वतः ही खत्म होने लगता है । -- आचार्य रंजन( ज्योतिषाचार्य & वास्तु विशेषज्ञ ),बेगुसराय (बिहार)

Monday, May 4, 2009

* भारत में प्रमुख शनि देव के सिद्ध-स्थल *

* कोकिला वन में स्थित सिद्ध शनि मन्दिर


* शिन्ग्नापुर (महाराष्ट्र ) गाँव में सिद्ध शनि पीठ

* ग्वालियर स्थित सिद्ध शानैश्चरा पीठ मंदिर
* चांदनी चौक (दिल्ली) स्थित शनि मंदिर



* काशी-धाम में स्थित सिद्ध शनि मंदिर
- आचार्य रंजन( ज्योतिषाचार्य & वास्तु विशेषज्ञ ), न्यू प्रोफ़ेसर कोलोनी , दिनकर नगर ,बेगुसराय (बिहार), Mob. No.: +91-9431236090 & Tel. No. : 06243-243901

Thursday, April 30, 2009

* HOT TIPS OF VAASTU *

* रीढ़ का दर्द कम करने के टोटके :
यदि शयन - कक्ष की पलंग की दरी के नीचे लिखनेवाली चाक का टुकडा रख दिया जाये तो रीढ़ की हड्डी का दर्द , कमर का दर्द मिट जाएगा एवं नींद आराम से आएगी ।
* ऐश्वर्य बढ़ाने हेतु टोटका :
- मध्य-एशिया ,सिंगापूर ,बैंकॉक ,हांगकांग में प्रचलन है की लाल रंग की रिबन यदि मुख्य-प्रवेश-द्वार पर लटकाई जाए तो घर में ऐश्वर्य की वृधी होती है। - भारत में मान्यता है की आम , कनेर, पीपल , अश्वाश्था एवं अशोक वृक्ष के पत्तों का तोरण लगाकर मुख्य - द्वार पर लटकाया जाये तो घर में ऐश्वर्य की वृधी के साथ-साथ सुख -शांति की प्राप्ति होती है ।
*व्यावसायिक - स्थल का नजर उतारने का टोटका :
यदि व्यापार की गति में जड़ता आ जाये तो प्रत्येक व्यवसायी को चाहिए की वो प्रत्येक शनिवार के दिन अपनी दूकान , कार्यालय अथवा प्रतिष्ठान के बाहरी स्तंभों पर निम्बू व सात हरी मिर्च बांध देना चाहिए । ये निम्बू मिर्च ऐसी जगह लगाएं , जहाँ सबकी नजर पड़े ।
* घुड़नाल अवश्य लगायें :
वास्तु-सम्बन्धी दोष की निवृति हेतु एवं घर की सुख , शांति के लिए मुख्य-द्वार पर घुड़नाल(HORSE-SHOE) अवश्य लगायें इससे शनि- ग्रह सम्बन्धी दोष की शांति होती है तथा व्यक्ति को मानसिक - तनाव से राहत मिलती है एवं उसे सुख-शांति का अनुभव होता है ।
* ज़मीन में चांदी का सर्प डालें :
नए मकान - फैक्ट्री व उद्योग को प्रारंभ करने के पूर्व भूमि-पूजन करके नींव का मुहुर्त अवश्य करना चाहिए और इस मुहुर्त में चांदी का सर्प बनाकर नींव(जमीन) में अवश्य डालना चाहिए । इससे नींव सुदृढ़ रहती है एवं मकान में कभी दरार नहीं पड़ती है तथा आपका मकान प्रकृतिक-प्रकोप से बचा रहता है ।

* शीघ्र - उन्नति हेतु मुख्य-द्वार पर केला का वृक्ष एवं तुलसी का पौधा लगायें
- आचार्य रंजन (ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ ) ,बेगुसराय (बिहार)

Thursday, April 23, 2009

* ज्योतिष के सन्दर्भ में :

आचार्य रंजन
(Astrologer & Vaastu Specialist),Begusarai

" ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान से मनुष्य को श्रेष्ठ लाभ यह है की उसे पूर्वजन्म के शुभाशुभ कर्मो का ज्ञान ,वर्तमान जन्म में शुभकर्म करने की आवश्यकता , मानविय जन्म का उद्देश्य , ईश्वरीय व मानवीय शक्ति में अन्तर , कर्म और भोग की मर्यादा , प्रारब्ध और प्रयत्न की सीमा व दोनों का परस्पर सम्बन्ध , अनुकूल व प्रतिकूल समय का ज्ञान व संकट समय मन में धैर्य रख उस पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्राप्त होती है । इस शक्ति से मन में संतोष , संतोष से चिंता का नाश ,चिंता-नाश से धर्म की प्राप्ति ,धर्म से धैर्य व शक्ति की प्राप्ति और शक्ति से ईश्वर के प्रति भक्ति व विश्वास क्रमशः प्राप्त करते हुए व सांसारिक आपत्तियों को सहर्ष स्वीकार करने की क्षमता प्राप्त होती है । "

* नवग्रह शांति के अचूक उपाय *



प्रयोग विधि :-

निम्न सामग्री को लेकर लगभग 8-10 लीटर पानी में डालकर खूब उबाल लें (लगभग १ घंटा ) । फिर इस पानी को रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दे । अगले दिन जब आप स्नान करने जाएँ तो इस liquid को छान कर किसी बर्तन में लगभग 2 ग्लास के आसपास निकाल कर ले जाये फिर जब आपका स्नान समाप्त हो जाये तो अंत में लगभग एक बाल्टी सादा पानी में इस liquid को मिलाकर खूब अच्छी तरह से स्नान करे , फिर देखें इसका चमत्कार !


सामग्री :-
१) कच्चा चावल (अरवा चावल ) :- १०० ग्राम
२) सरसों :- १०० ग्राम
३) नागरमोथा :- १०० ग्राम
४) सुखा आंवला :- १०० ग्राम
५) हल्दी (गाँठ वाली ) :- ५० ग्राम
६) ढुबी (दूब घास ) :- १०० ग्राम लगभग
७) तुलसी पत्र :- ५१ से १०८ पत्ता
८) बेलपत्र :- ५१ से १०८ पत्ता ( ३-३ पत्तों वाला )



लाभ :-
* कोई भी इंसान कितना ही tension में क्यों न हो ?कोई भी कार्य यदि विफल हो रहा हो !उपरोक्त प्रयोग प्रतेक मनुष्य को शारीरिक , मानसिक एवं आर्थिक रूप में तुंरत लाभ प्रदान करता है ।
*यदि किसी भी ग्रह का कोई विशिस्ट अनुष्ठान करने का कोई सलाह दिए हो और उसे करने में आप असमर्थता अनुभव कर रहे हो तो भी ऊपर लिखे प्रयोग कर आप तुंरत लाभान्वित हो सकते है -- आचार्य रंजन
नोट :- प्रयोग के दोरान किसी भी शंका का समाधान हेतु आप हमसे किसी भी समय मुफ्त सलाह ले सकते है
- Aacharya Ranjan
(Astrologer & Vaastu Specialist)






नवरत्न एवं उसके समतुल्य प्रभाव प्रदान करने वाले वनस्पतियाँ ** -Aacharya Ranjan


ग्रह - रत्न - वनस्पति - दिन
सूर्य - मानिक (Ruby) - बेल का जड़ - रविवार
चंद्रमा - मोती (Pearl) - खिरनी का जड़ - सोमवार
मंगल - मूंगा (Coral) - अनंतमूल का जड़ - मंगलवार
बुध - पन्ना(Emarald) - विधारा का जड़ - बुधवार
बृहस्पति - पुखराज(Topaz) - केला का जड़ - गुरुवार
शुक्र - हीरा (Diamond) - शर्पुन्खा का जड़ - शुक्रवार
शनि - नीलम (Blue Shapphire) - बिच्छु का जड़ - शनिवार
राहू - गोमेदGomed ) - श्वेत चन्दन का जड़ - शनिवार
केतु - लहसुनिया (Cats Eye) - अश्वगंधा का जड़ - बुधवार

नोट :- वनस्पति धारण करने से पूर्ब समय की जानकारी हेतु पहले संपर्क कर ले । -आचार्य रंजन (ज्योतिषी & वास्तु विशेषज्ञ )

* VERY HOT TIPS OF VAASTU *


-"आचार्य रंजन "

* धन की कमी की वजह से यदि मकान नहीं बना पा रहे हों तो उस ज़मीन पर 'रवि-पुष्य ' या 'शुक्र -पुष्य ' नक्षत्र में एक साथ दो "अनार का पौधा " ईशान क्षेत्र में लगा दें । मकान शीघ्र बन जायेगा ।

* यदि मकान बनाने के लिए धन नहीं है तो अपने ज़मीन का ' ईशान -क्षेत्र अग्रेत' कर किसी वास्तु - विशेषज्ञ के सलाह के उपरांत ज़मीन के ईशान में ही 'बोरिंग' करवा दें । इससे मकान बनने के साथ - साथ आय के नए -नए क्षेत्र भी बन जायेंगे ।


* यदि घर में कुंवारी कन्या के विवाह में विलंब हो रहा हो , तो उस कन्या का 'शयनकक्ष' वायव्य -क्षेत्र में कर दें एवं " केले के गाछ का मूल (ROOTS)" पीले धागे में बाँध कर दाहिने भुजा पर बाँध दें , विवाह तुंरत हो जायेगा ।

* कार्यालय / दूकान में उत्तरी-ईशान क्षेत्र में "मछली-घर (Acquarium)" अवश्य लगवाएं ,आय के श्रोत बढ़ जायेंगे।

* कार्यालय /दूकान में काउंटर पर "Mungoose" की विधिवत स्थापना करें । इसके प्रभाव से ग्राहक बार-बार आते हैं तथा आपके द्वारा दिया गया उधार की राशि भी स्वतः लौट आती है ।

Wednesday, April 22, 2009

* स्वयं जानें नींव खोदने की दिशा *


गृहारंभ में नींव खोदने के लिए राहु की दिशा का विचार परम आवश्यक होता है , क्योंकि कभी भी राहु के मुख एवं पुच्छ में नींव नहीं खोदना चाहिए । अतः सदा सर्वदा नींव की खुदाई राहु के पीठ में करना चाहिए
किस राशिके सूर्य में राहु का मुख , पुच्छ तथा पीठ किस दिशा में है , इसे निम्न तालिका से स्वयं जानें -
:गृहारंभ :
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सूर्य की राशि - राहू का मुख - राहू का पूछ - राहू का पीठ
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सिंह,कन्या,तुला - ईशान(NE) - नैर्र्रित्य(SW) - आग्नेय (SE)
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वृश्चिक,धनु,मकर - वायव्य(NW) - आग्नेय(SE) - ईशान (NE)
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कुम्भ ,मीन,मेष - नैर्रित्य (SW) - ईशान (NE) - वायव्य (NW)
....................................................................
वृष,मिथुन, कर्क - आग्नेय (SE) - वायव्य (NW) - नैर्रित्य (SW)
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उदाहरनार्थ: यदि आपको सिंह ,कन्या या तुला राशि के सूर्य में घर का निर्माण आरम्भ करना हो तो इस समय
चूँकि राहू का मुख ईशान (NE) में रहता है तथा राहू का पूछ नैर्रित्य (SW) में रहता है । अतः इन दिशाओं में
नींव की खुदाई न करके राहू की पीठ ,जो की आग्नेय (SE) दिशा में होता है , उसी दिशा में खुदाई या नींव देनी चाहिय ।
........आचार्य रंजन
( ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ )

Wednesday, March 18, 2009

* अंग्रेजी तिथि के अनुसार सूर्य की राशि जानें :*

SUN IN THE RASHI (In every year):

मेष : 14th अप्रैल - 13th मई
वृष : 14th मई - 13th जून
मिथुन : 14th जून - 13th जुलाई
कर्क : 14th जुलाई - 13th अगस्त
सिंह : 14th अगस्त - 13th सितम्बर
कन्या : 14th सितम्बर - 13th अक्टूबर
तुला : 14th अक्टूबर - 13th नवम्बर
वृश्चिक : 14th नवम्बर - 13th दिसम्बर
धनु : 14th दिसम्बर - 13th जनवरी
मकर : 14th जनवरी - 13th फ़रवरी
कुम्भ : 14th फ़रवरी - 13th मार्च
मीन : 14th मार्च - 13th अप्रैल
- आचार्य रंजन



Tuesday, March 17, 2009

* वास्तु दोषों का निवारण करती है गाय *

-आचार्य रंजन
जिस प्लाट पर भवन या घर का निर्माण करना हो यदि वहां पर बछड़े वाली गाय को लाकर बांधा जाए तो वहां संभावित वास्तु दोषों का स्वत: निवारण हो जाता है। कार्य निर्विघ्न पूरा होता है और समापन तक आर्थिक बाधाएं नहीं आतीं।
गाय के प्रति भारतीय आस्था को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है। गो-सेवा को एक कत्र्तव्य के रूप में माना गया है। पशु रूप में गाय सृष्टिमातृका कही जाती है। गाय के रूप में पृथ्वी की करुण पुकार और विष्णु से अवतार के लिए निवेदन के प्रसंग बहुत प्रसिद्ध हैं।
‘समरांगण सूत्रधार’ जैसा प्रसिद्ध वृहद् वास्तु ग्रंथ गो रूप में पृथ्वी-ब्रrादि के समागम-संवाद से ही आरंभ होता है। वास्तुग्रंथ ‘मयमतम्’ में कहा गया है कि भवन निर्माण का शुभारंभ करने से पूर्व उस भूमि पर ऐसी गाय को लाकर बांधना चाहिए जो सवत्सा या बछड़े वाली हो।
नवजात बछड़े को जब गाय दुलारकर चाटती है तो उसका फेन भूमि पर गिरकर उसे पवित्र बनाता है और वहां होने वाले समस्त दोषों का निवारण हो जाता है। यही मान्यता वास्तुप्रदीप, अपराजितपृच्छा आदि में भी आई है। महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि गाय जहां बैठकर निर्भयतापूर्वक सांस लेती है, उस स्थान के सारे पापों को खींच लेती है- निविष्टं गोकुलं यत्र श्वांस मुंचति निर्भयम्। विराजयति तं देशं पापं चास्याप कर्षति॥
गाय का घर में पालन करना बहुत लाभकारी है। ऐसे घरों में सर्वबाधाओं और विघ्नों का निवारण हो जाता है। बच्चों में भय नहीं रहता। विष्णु पुराण में कहा गया है कि जब श्रीकृष्ण पूतना के दुग्धपान से डर गए तो नंद दंपती ने गाय की पूंछ घुमाकर उनकी नजर उतारी और भय का निवारण किया। सवत्सा गाय के शकुन लेकर जाने से कार्य सिद्ध होता है।
पद्मपुराण, और कूर्मपुराण में कहा गया है कि कभी गाय को लांघकर नहीं जाना चाहिए। किसी भी साक्षात्कार, उच्च अधिकारी से भेंट आदि के लिए जाते समय गाय के रंभाने की ध्वनि कान में पड़ना शुभ है। संतान लाभ के लिए घर में गाय की सेवा अच्छा उपाय कहा गया है।
शिवपुराण व स्कंदपुराण में कहा गया है कि गो सेवा और गोदान से यम का भय नहीं रहता। गाय के पांव की धूली का भी अपना महत्व है। यह पाप विनाशक है, ऐसा गरुड़पुराण और पद्मपुराण का मत है।

साभार :-दैनिक भास्कर

Sunday, March 1, 2009

नक्षत्र वास्तु के यथार्थ को आत्मसात कर सुखमय जीवन जीना सीखें



ज्योतिष आपके जीवन के मार्ग को सुगम बनाती है एवं वास्तु द्बारा निर्मित भवन आपको सुख,शान्ति और समृद्धि प्रदान करती है।
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