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Sunday, August 9, 2009

* नक्षत्र एवं नक्षत्र का स्वरुप *

आकाश मंडल एवं भचक्र में असंख्य तारे हैं , जो कुछ विशेष प्रकार की आकृतियाँ बनाते दिखाई देते हैं । जैसे - अश्व , शकट , सर्प , हाथ , चक्र , त्रिकोण इत्यादि । हमारे भारतीय ज्योतिषाचार्यों द्वारा ताराओं की इन्हीं आकृति - विशेष के आधार पर उनके समूह को जिसे हम "नक्षत्र " कहते हैं , का नाम रखा गया है ।

नीचे हम नक्षत्रों के नाम तथा आकाश-मंडल में उनका स्वरुप तथा दिशा (जिधर वे अवाश्थित हैं ) की जानकारी दे रहे हैं ---

नक्षत्रों के नाम- नक्षत्रों के स्वरुप- दिशा(आकाश में)

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१- अश्वनी --- अश्वमुख के समान ---उत्तर

२- भरनी --- योनी के समान ---उत्तर

३- कृतिका ---छुरे के समान ---मध्य

४- रोहिणी ---शकट के समान ---मध्य

५.- मृगशिरा--हिरन मुख के समान -दक्षिण

६- आर्द्रा ---मणि के समान --- दक्षिण

७ - पुनर्वसु ---गृह के समान --- दक्षिण

- पुष्य ---वन के समान ---मध्य

९- आश्लेषा ---चक्र के समान ---मध्य

१०- मघा ---भवन के समान ---उत्तर

११- पूर्व-फाल्गुनी -चारपाई के समान--उत्तर

१२- उत्तरा-फाल्गुनी -शय्या के समान -उत्तर

१३- हस्त ---हाथ के समान ---दक्षिण

१४- चित्रा ---मोती के समान ---मध्य

१५- स्वाति ---मूंगे के समान ---उत्तर

१६- विशाखा ---तोरण के समान --- उत्तर

१७- अनुराधा ---चावल के समान ---दक्षिण

१८- ज्येष्ठा ---कुंडल के समान ---दक्षिण

१९- मूला ---सिंह के पूँछ के समान-दक्षिण

२०- पूर्वा-सादा -हाथी के दंत के समान-दक्षिण

२१- उत्तरा-सादा -मंच के समान ---दक्षिण

२२- श्रवण ---वामन के ३चरण के समान- मध्य

२३- धनिष्ठा --मृदंग के समान ---मध्य

२४- शतभिषा -वृत्त के समान ---मध्य

२५- पूर्वा -भाद्रपद -मंच के समान ---उत्तर

२६- उत्तरा-भाद्रपद -युगल तारे के समान --उत्तर

२७- रेवती ---मृदंग माला के समान --मध्य

********************आचार्य रंजन (ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ )

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