

२१ अगस्त से २०-२८ सितम्वर तक पैदा हुए व्यक्ति आमतौर से जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं । उनमें आश्चर्यजनक स्मरण-शक्ति वाली बुध्धि होती है । अपने संपर्क में आने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहते हैं और उनके प्रति अच्छे बुरे की समझ रखते हैं । आमतौर से उन पर न हावी हुआ जा सकता है और न ही उन्हें धोखा दिया जा सकता है ।
वे हर बात का गहराई से विश्लेषण और परख करते हैं । वे अच्छे आलोचक होते हैं , आम तौर से इतने अधिक की उन्हें भलाई या प्रसन्नता नहीं मिल पाती है ।
बेमेल वस्तुओं पर उनका ध्यान बड़ी जल्दी से जाता है । अपने घरों के बारे में उनकी उत्तम रुचि होती है ।
आम तौर से वे किसी काम के प्रारम्भ-कर्ता नहीं होते , लेकिन जो योजनायें या काम उन्हें आकर्षित करते हैं अथवा दुसरे लोग जिन्हें पूरा करने में विफल होते हैं , उन्हें वे सफलता से पूरा कर देते हैं। जिस लक्ष्य की ओर उनका ध्यान जाता है , पूरे दत्तचित्त होकर उसके लिए काम करते हैं और जब तक उसे प्राप्त कर लेते , चैन से नहीं बैठते हैं ।
वे पद का बहुत अधिक सम्मान करते हैं । कानून तथा कानून के फैसले का उतशाह से समर्थन करते हैं । वे उत्तम वकील और वक्ता बन सकते हैं , लेकिन उनका झुकाव नए विचारों को जन्म देने के बजाय पूर्व घटनाओं / दृष्टान्तों का समर्थन करने की ओर अधिक रहता है । मेहनती स्वभाव , इच्छा-शक्ति और संकल्प के कारण वे वैज्ञानिक खोज और व्यापार में भी सफल होते हैं ।
उनमें अपने तक और अपने विचारों तक सिमित रहने की प्रवृति होती है । लक्ष्य-प्राप्ति के लिए वे स्वार्थ से भी काम लेते दिखाई देते हैं । एनी किसी वर्ग की अपेक्षा उनमें अच्छाई और बुराई की हद तक जाने की क्षमता अधिक होती है । यदि उनमें पैसे का मोह पैदा हो जाए तो उसे पाने के लिए कोई कोर- कसर नहीं छोडेंगे । वे प्रायः किसी भी काम के अनुरूप अपने को ढाल सकते हैं ।
प्रेम के विषय में उन्हें समझ पाना सबसे कठिन होता है । विश्व में सबसे अच्छे और सबसे बुरे स्त्री /पुरूष वर्ष के इसी भाग में पैदा हुए हैं । प्रारंभिक वर्षों में प्रायः सभी नेक और साफ़ दिल वाले होते हैं लेकिन जब बदलते हैं तो पूरी प्रतिहिंषा से बदलते हैं और इसके ठीक उल्टे बन जाते हैं । फिर भी क़ानून के प्रति जन्मजात सम्मान - भावना और अपनी स्वाभाविक कुशलता के कारण वे दूसरे वर्ग के लोगों की अपेक्षा अपनी भावनाओं को छिपाने में अधिक सफल रहते हैं । यदि स्वयं पर काबू न रहा तो उनमें प्रायः मादक द्रव्यों और शराब के सेवन की प्रवृति पैदा हो जाती है ।
स्वास्थ्य के बारे में आम तौर से वे रोगों के अपेक्षाकृत कम शिकार होते हैं , लेकिन उनमें एक विचित्र बात यह होती है की अखबारों में पढ़कर हर बिमारी से स्वयं को पीड़ित होने की कल्पना करने लगते हैं ।
भोजन के बारे में वे बहुत सुरुचिपूर्ण होते हैं । रुचि का भोजन न मिलने पर उनकी भूख मर जाती है । वातावरण के प्रति वे अत्यन्त संवेदनशील होते हैं । ताल-मेल में जरा सी कमी या चिद्हन से उनकी स्नायु प्रणाली पर प्रभाव पड़ता है और उन्हें कब्ज या पेचिश की सिकायत हो सकती है । उनमें फेफडों की परेशानी की भी प्रवृति होती है साथ ही कन्धों और भुजाओं की नसों में भी दर्द हो सकता है ।
इस अवधि में पैदा हुए लोगो को अपेक्षाकृत अधिक धुप और ताज़ी हवा की आवश्यकता होती है ।
ऐसे लोग सबसे प्रबल मानसिक धरातल पर होते हैं । जीवन के प्रति उनके विचार आम तौर से यथाथ्वादी , विश्लेष्णात्मक , संदेही , चतुर और पारखी होते हैं । भीड़ का साथ देने के बजाय वे प्रायः एक अलोकप्रिय उद्देश्य की हिमायत करते हैं ।
मानव स्वभाव के उत्तम पारखी होने के कारण वे आमतौर से अपनी पहली धरना पर ही भरोसा कर सकते हैं । लेकिन बाल की खाल निकालने वाले होते हैं और यदि इस प्रवृति को ठीक से नियंत्रण में नहीं रखेंगे तो बाद में रोग-भ्रमी हो जायेंगे । इन लोगों के लिए पैसे की बहुत कीमत होती है ।
साहित्य-समीक्षक और कला - समीक्षक के रूप में वे प्रायः अत्यन्त कुशल रहते हैं । स्मरंशक्ति अच्छी होती है , तेज़ी से पढ़ सकते हैं और उनका ध्यान कमजोरियों की ओर शीघ्र चला जाता है । कड़ी म्हणत , दूरदर्शिता और असाधारण परिशुध्धता से वे प्रायः सफलता प्राप्त कर लेते हैं , हलाँकि वर्षों तक वे छिपे रहे आते हैं, परन्तु देर-सवेर उन्हें प्रमुखता मिलती ही है ।
उनमें प्रेम का बहुत गहरा भाव होता है , लेकिन भावुक या दिखावे वाला नहीं । एक बार प्रेम पैदा हो जाने पर वे बहुत वफादार रहते हैं , लेकिन ईर्ष्यालु होने की भी प्रवृति होती है । उनके विचार दृढ़ और ओजस्वी होते हैं । एक बार निश्चय कर लेने पर दुनिया का कोई उपदेश उन्हें अपने विचारों से तिलभर भी नहीं डिगा सकता ।
उनमें प्रायः वस्त्रों और साज - श्रृंगारों पर बहुत अधिक ध्यान देने की प्रवृति रहती है।
उनकी बौध्धिकता मूलतः प्रगतिशील होती है , किंतु विस्तार पर वे बहुत अधिक ध्यान देते हैं । उन्हें दूसरो के गुनों को सराहने , अधिक सहिष्णु होने और आलोचना में अधिक नरमी बरतने की आदत डालनी चाहिए ।
इन लोगों में एक विचित्र बात यह है की वे सदा जवान रहते/ दीखते हैं और उनकी आयु मालूम नहीं होती है । छोटी-छोटी बातों पर वे चिढ और नाराज़ हो जाते हैं लेकिन रक्तपात से घृणा करते हैं ।
चूँकि वे अत्यन्त संवेदनशील होते हैं अतः चिंता का उन पर अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ता है । पाचन अंग आम तौर से कमजोर होते हैं और भोजन में सावधानी न बरतने पर अक्सर आमाशय में घाव हो जाते है । हल्का सदा भोजन , ढेर सारा पानी , ताज़ी हवा , धुप स्नान और सामान्य से अधिक निंद्रा और विश्राम आम तौर से इन लोगों को पुनः स्वस्थ कर देते हैं ।
* विशेष जानकारी हेतु संपर्क कर सकते हैं * - आचार्य रंजन ( ज्योतिषाचार्य & वास्तु विशेषज्ञ ) सह निदेशक " महर्षि भृगु ज्योतिष संस्थान ", बेगुसराय
हमारा तो जुलाई का है!
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